Greater Glory Of God

लूकस अध्याय 15

सन्त लूकस का सुसमाचार – अध्याय 15

लूकस अध्याय 15 का परिचय

संत लूकस रचित सुसमाचार अध्याय 15 सुसमाचारों का सुसमाचार कहा जाता है। संत लूकस रचित सुसमाचार अध्याय 15 सबसे प्रसिद्ध तीन दृष्टान्तों को देख सकते हैं।
इन तीनों दृष्टान्तों के द्वारा ईश्वर के प्रेम की गहराई हम जान सकते हैं। तीनों दृष्टान्तों में खोया हुआ ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है। तीनों दृष्टान्त इस प्रकार हैं :-
भटकी हुई भेड़ का दृष्टान्त
खोया हुआ सिक्का
खोया हुआ लड़का

तीनों दृष्टान्तों का उद्देश्य एक ही है। यह विषय इतना महत्वपूर्ण है कि प्रभु येसु इस विषय को समझाने के लिए तीन-तीन दृष्टान्तों का प्रयोग करते हैं।

तीनों दृष्टान्तों का उद्देश्य – “ईसा का उपदेश सुनने के लिए नाकेदार और पापी उनके पास आया करते थे। फ़रीसी और शास्त्री यह कहते हुए भुनभुनाते थे, “यह मनुष्य पापियों का स्वागत करता है और उनके साथ खाता-पीता है”। इस पर ईसा ने उन को यह दृष्टान्त सुनाया, …”

यहूदी गैर-यहूदियों को पापी मानते थे। वास्तव में उनके धर्मग्रन्थ के अनुसार वे गैर-यहूदियों से संपर्क नहीं रख सकते थे। लेकिन प्रभु येसु उन अछूत लोगों को ईश्वर के लिए “ज्यादा” विशेष और प्रिय बताते हैं। नहीं-खोयी-हुई 99 भेड़ें इस्राएलियों को दर्शाता है और एक खोई हुई गैर-यहूदियों को। गैर-यहूदी हर पापी को दर्शाता है।

तीनों दृष्टान्तों में छुपी हुई भावनाएँ :- इन लिखित शब्दों के पीछे की भावनाओं को हमें देखने की जरुरत है। खोने में दुःख का अनुभव और पाने में ख़ुशी का अनुभव। ये शब्दों में नहीं बल्कि खान-पान और नाच-गान के द्वारा प्रकट किया जाता है।

इन तीनों दृष्टान्तों के महत्व को जानने हमें इनके अनलिखित बातों को महसूस करने की जरुरत है।

भटकी हुई भेड़ का दृष्टान्त

1) ईसा का उपदेश सुनने के लिए नाकेदार और पापी उनके पास आया करते थे।

2 फ़रीसी और शास्त्री यह कहते हुए भुनभुनाते थे, “यह मनुष्य पापियों का स्वागत करता है और उनके साथ खाता-पीता है”।

3) इस पर ईसा ने उन को यह दृष्टान्त सुनाया,

4) “यदि तुम्हारे एक सौ भेड़ें हों और उन में एक भी भटक जाये, तो तुम लोगों में कौन ऐसा होगा, जो निन्यानबे भेड़ों को निर्जन प्रदेश में छोड़ कर न जाये और उस भटकी हुई को तब तक न खोजता रहे, जब तक वह उसे नहीं पाये?

5) पाने पर वह आनन्दित हो कर उसे अपने कन्धों पर रख लेता है

6) और घर आ कर अपने मित्रों और पड़ोसियों को बुलाता है और उन से कहता है, ’मेरे साथ आनन्द मनाओ, क्योंकि मैंने अपनी भटकी हुई भेड़़ को पा लिया है’।

7) मैं तुम से कहता हूँ, इसी प्रकार निन्यानबे धर्मियों की अपेक्षा, जिन्हें पश्चात्ताप की आवश्यकता नहीं है, एक पश्चात्तापी पापी के लिए स्वर्ग में अधिक आनन्द मनाया जायेगा।

खोया हुआ सिक्का

8) “अथवा कौन ऐसी स्त्री होगी, जिसके पास दस सिक्के हों और उन में एक भी खो जाये, तो बत्ती जला कर और घर बुहार कर सावधानी से तब तक न खोजती रहे, जब तक वह उसे नहीं पाये?

9) पाने पर वह अपनी सखियों और पड़ोसिनों को बुला कर कहती है, ’मेरे साथ आनन्द मनाओ, क्योंकि मैंने जो सिक्का खोया था, उसे पा लिया है’।

10) मैं तुम से कहता हूँ, इसी प्रकार ईश्वर के दूत एक पश्चात्तापी पापी के लिए आनन्द मनाते हैं।”

खोया हुआ लड़का

11) ईसा ने कहा, “किसी मनुष्य के दो पुत्र थे।

12) छोटे ने अपने पिता से कहा, ’पिता जी! सम्पत्ति का जो भाग मेरा है, मुझे दे दीजिए’, और पिता ने उन में अपनी सम्पत्ति बाँट दी।

13 थोड़े ही दिनों बाद छोटा बेटा अपनी समस्त सम्पत्ति एकत्र कर किसी दूर देश चला गया और वहाँ उसने भोग-विलास में अपनी सम्पत्ति उड़ा दी।

14) जब वह सब कुछ ख़र्च कर चुका, तो उस देश में भारी अकाल पड़ा और उसकी हालत तंग हो गयी।

15) इसलिए वह उस देश के एक निवासी का नौकर बन गया, जिसने उसे अपने खेतों में सूअर चराने भेजा।

16) जो फलियाँ सूअर खाते थे, उन्हीं से वह अपना पेट भरना चाहता था, लेकिन कोई उसे उन में से कुछ नहीं देता था।

17) तब वह होश में आया और यह सोचता रहा-मेरे पिता के घर कितने ही मज़दूरों को ज़रूरत से ज़्यादा रोटी मिलती है और मैं यहाँ भूखों मर रहा हूँ।

18) मैं उठ कर अपने पिता के पास जाऊँगा और उन से कहूँगा, ’पिता जी! मैंने स्वर्ग के विरुद्ध और आपके प्रति पाप किया है।

19) मैं आपका पुत्र कहलाने योग्य नहीं रहा। मुझे अपने मज़दूरों में से एक जैसा रख लीजिए।’

20) तब वह उठ कर अपने पिता के घर की ओर चल पड़ा। वह दूर ही था कि उसके पिता ने उसे देख लिया और दया से द्रवित हो उठा। उसने दौड़ कर उसे गले लगा लिया और उसका चुम्बन किया।

21) तब पुत्र ने उस से कहा, ’पिता जी! मैने स्वर्ग के विरुद्ध और आपके प्रति पाप किया है। मैं आपका पुत्र कहलाने योग्य नहीं रहा।’

22) परन्तु पिता ने अपने नौकरों से कहा, ’जल्दी अच्छे-से-अच्छे कपड़े ला कर इस को पहनाओ और इसकी उँगली में अँगूठी और इसके पैरों में जूते पहना दो।

23) मोटा बछड़ा भी ला कर मारो। हम खायें और आनन्द मनायें;

24) क्योंकि मेरा यह बेटा मर गया था और फिर जी गया है, यह खो गया था और फिर मिल गया है।’ और वे आनन्द मनाने लगे।

25) “उसका जेठा लड़का खेत में था। जब वह लौट कर घर के निकट पहुँचा, तो उसे गाने-बजाने और नाचने की आवाज़ सुनाई पड़ी।

26) उसने एक नौकर को बुलाया और इसके विषय में पूछा।

27) इसने कहा, ’आपका भाई आया है और आपके पिता ने मोटा बछड़ा मारा है, क्योंकि उन्होंने उसे भला-चंगा वापस पाया है’।

28) इस पर वह क्रुद्ध हो गया और उसने घर के अन्दर जाना नहीं चाहा। तब उसका पिता उसे मनाने के लिए बाहर आया।

29) परन्तु उसने अपने पिता को उत्तर दिया, ’देखिए, मैं इतने बरसों से आपकी सेवा करता आया हूँ। मैंने कभी आपकी आज्ञा का उल्लंघन नहीं किया। फिर भी आपने कभी मुझे बकरी का बच्चा तक नहीं दिया, ताकि मैं अपने मित्रों के साथ आनन्द मनाऊँ।

30) पर जैसे ही आपका यह बेटा आया, जिसने वेश्याओं के पीछे आपकी सम्पत्ति उड़ा दी है, आपने उसके लिए मोटा बछड़ा मार डाला है।’

31) इस पर पिता ने उस से कहा, ’बेटा, तुम तो सदा मेरे साथ रहते हो और जो कुछ मेरा है, वह तुम्हारा है।

32) परन्तु आनन्द मनाना और उल्लसित होना उचित ही था; क्योंकि तुम्हारा यह भाई मर गया था और फिर जी गया है, यह खो गया था और मिल गया है’।”

The Content is used with permission from www.jayesu.com